मंगलवार, 23 दिसंबर 2025

इतिहास : 23 दिसंबर की महत्वपूर्ण घटनाएं




किसान दिवस 


23 दिसम्बर को भारत में 'किसान दिवस' मनाया जाता है। इस दिन प्रमुख किसान नेता पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती मनाई जाती है। उनका जन्म 23 दिसम्बर 1902 को उत्तर प्रदेश के शहरी जिले में हुआ था। भारतीय कृषि नीति में उनके योगदान को याद किया जाता है यह दिन सैनिकों के सम्मान और अधिकार पर केंद्रित है।


शनि के उपग्रह 'रिया' की खोज 


इटालियन-फ़्रांसीसी खगोलशास्त्री जियोवनी डोमेनिको कैसिनी ने 23 दिसंबर 1672 को शनि के चंद्रमा रिया (रिया) की खोज की थी। यह शनि का दूसरा चंद्रमा था। कैसिनी ने रिया के अलावा शनि के तीन अन्य मूनों इपेटस (1671), टेथिस (1684) और डायोन (1684) की भी खोज की। रिया शनि का दूसरा सबसे बड़ा चंद्रमा है। 


पी. वी. नरसिंह राव जी की स्मृति 


पामुलापति वैंकट नरसिंह राव जी भारत के नौवें प्रधानमंत्री थे। वे 21 जून 1991 से 16 मई 1996 तक प्रधानमंत्री रहे। उनके कार्यकाल में 1991 के आर्थिक सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को उदारीकरण की दिशा में धीरे-धीरे ख़त्म कर दिया। 23 दिसम्बर 2004 को उनका निधन हो गया। वर्ष 2024 में भारत सरकार ने उन्हें 'भारत रत्न' से सम्मानित किया।


रामवृक्ष बेनीपुरी जी का जन्म दिवस


23 दिसंबर 1899 को हिंदी के महान वैज्ञानिक रामवृक्ष बेनीपुरी जी का जन्म हुआ। वे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े हुए हैं और उनके साहित्य में सामाजिक वैयक्तिकता और राष्ट्रीय भावना का तंबाकू रूप शामिल है। 'जय प्रकाश', 'नेत्रदान', 'सीता की मां', 'विजेता', 'मील के पत्थर', 'गेहूँ और गुलाब' आदि उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं।


स्वामी श्रद्धानन्द जी की स्मृति 


स्वामी दयानंद सरस्वती जी के शिष्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक स्वामी श्रद्धानंद जी ने 1901 में ब्रिटेन में वैदिक धर्म और भारतीय शिक्षा दीक्षा वाले संस्थान "गुरुकुल" की स्थापना की। इस समय यह मानद विश्वविद्यालय है, जिसका नाम 'गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय' है। 23 दिसम्बर 1926 को उनका निधन हो गया।



सोमवार, 22 दिसंबर 2025

इतिहास : 22 दिसंबर की महत्वपूर्ण घटनाएं

 



श्रीगुरु गोविंद सिंह जी प्रकाश पर्व


श्रीगुरु गोविंद सिंह जी (1666–1708) सिख पंथ के दसवें एवं अंतिम मानव गुरु थे। उनका जन्म 22 दिसंबर 1666 ई. को पटना साहिब (वर्तमान बिहार) में हुआ। उनका जीवन धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए समर्पित रहा। 1699 ई. में बैसाखी के अवसर पर उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की। उन्होंने सिख समुदाय को एक संगठित, अनुशासित और समानतावादी पहचान दी। उन्होंने अन्याय और धार्मिक उत्पीड़न के विरुद्ध संघर्ष को धर्म का अंग माना। उन्होंने 'दसम ग्रंथ' की रचना की, जिसमें वीर रस, नीति और आध्यात्मिक चिंतन का समन्वय है। 1708 ई. में नांदेड़ (महाराष्ट्र) में उन्होंने 'गुरु ग्रंथ साहिब' को सिखों का शाश्वत गुरु घोषित किया।


राष्ट्रीय गणित दिवस (रामानुजम स्मृति दिवस)


श्रीनिवास रामानुजन् इयंगर (1887-1920) एक महान् भारतीय गणितज्ञ थे। उनकी स्मृति में प्रत्येक वर्ष 22 दिसम्बर को 'राष्ट्रीय गणित दिवस' मनाया जाता है। रामानुजन का जन्म 22 दिसम्बर 1887 को कोयम्बटूर के समीप ईरोड नाम के ग्राम में हुआ था। इन्होंने संख्या सिद्धांत, विश्लेषण, अनंत श्रेणियाँ और निरंतर भिन्नांशों में महत्वपूर्ण परिणाम दिए। उनके द्वारा गणित के लिए किए गए अनुसंधान आज भी दुनिया भर के गणितज्ञों के लिए प्रेरणा हैं। हालांकि इनके द्वारा किए गए अधिकांश कार्य अभी भी वैज्ञानिकों के लिए अबूझ पहेली बने हुए हैं। 


भारत में पहली मालगाड़ी चली


भारत में पहली यात्री ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को मुंबई से ठाणे के बीच चली थी, लेकिन पहली मालगाड़ी 22 दिसंबर 1851 को उत्तराखंड के रुड़की से पिरन कलियर के बीच चलाई गई थी। गंगा नहर के निर्माण के लिए मिट्टी और निर्माण सामग्री ढोने के लिए इस भाप इंजन वाली ट्रेन का उपयोग किया गया था, जो 10 किमी की दूरी 38 मिनट में तय करती थी। इस ट्रेन में इस्तेमाल होने वाले भाप इंजन का नाम 'थॉमसन' था, जिसे इंग्लैंड से मंगाया गया था।

रविवार, 21 दिसंबर 2025

इतिहास : 21 दिसंबर की महत्वपूर्ण घटनाएं...

 



महात्मा गांधी का धमतरी आगमन 


अपने प्रथम छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान महात्मा गांधी जी 21 दिसंबर 1920 को धमतरी पहुंचे। पंडित सुंदरलाल शर्मा जी के आमंत्रण पर वे कंडेल नहर सत्याग्रह में शामिल होने के लिए आए थे। गांधी जी के आगमन की सूचना मात्र से ही ब्रिटिश सरकार ने किसानों पर लगाए गए जुर्माने (नहर पानी टैक्स) को वापस ले लिया, जो एक बड़ी जीत थी। मकईबंध चौक में जनसभा को संबोधित करते हुए गांधी जी ने सत्य, अहिंसा आधारित सत्याग्रह का महत्व प्रतिपादित करते हुए कंडेल नहर सत्याग्रह के सफल संचालन के लिए बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव जी, नारायण राव मेघावाले जी और सुंदरलाल शर्मा जी की सराहना की। गांधीजी का यह प्रवास असहयोग आंदोलन के दौरान छत्तीसगढ़ में जनजागरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था।


ठाकुर प्यारेलाल सिंह जयंती 


ठाकुर प्यारेलाल सिंह जी (1891-1954) छत्तीसगढ़ में 'श्रमिक आन्दोलन' के सूत्रधार तथा 'सहकारिता आन्दोलन' के प्रणेता थे। उनका जन्म 21 दिसम्बर 1891 ई. को राजनांदगांव जिले के 'दैहान' नामक ग्राम में हुआ था। उन्होंने राजनांदगांव में मिल मज़दूरों को संगठित किया। उनके नेतृत्व में 1919 में मज़दूरों ने देश की सबसे पहली और लम्बी हड़ताल की थी। वे 1920 में महात्मा गाँधी के संपर्क में आए और असहयोग आंदोलन एवं सत्याग्रह आंदोलन में सक्रिय रहते हुए जेल गए। 1937 में रायपुर नगरपालिका के अध्यक्ष चुने गए। 1945 में छत्तीसगढ़ के बुनकरों को संगठित करने के लिए आपके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ बुनकर सहकारी संघ की स्थापना हुई। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उनकी स्मृति में सहकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 'ठाकुर प्यारेलाल सिंह सम्मान' दिया जाता है। 


• पंडित सुन्दरलाल शर्मा जयंती 


'छत्तीसगढ़ का गाँधी' कहे जाने वाले पंडित सुन्दरलाल शर्मा जी (1881-1940) का जन्म 21 दिसम्बर 1881 ई. को राजिम के निकट महानदी के तट पर बसे ग्राम चंद्रसूर में हुआ था। वे अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और कवि थे। उन्होंने हिन्दी तथा छत्तीसगढ़ी में लगभग 18 ग्रंथों की रचना की, जिसमें 'छत्तीसगढ़ी दान-लीला' उल्लेखनीय है। वे 'राष्ट्रीय कृषक आंदोलन', 'मद्यनिषेध', 'आदिवासी आंदोलन' तथा 'स्वदेशी आंदोलन' से जुड़े रहे। 'असहयोग आंदोलन' के दौरान जेल गए। हरिजनोद्धार व सामाजिक सुधार के उनके कार्यों की महात्मा गांधी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उनकी स्मृति में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा साहित्य/आंचिलेक साहित्य के लिए 'पण्डित सुन्दरलाल शर्मा सम्मान' प्रदान किया जाता है। बिलासपुर में इनके नाम पर 'पण्डित सुन्दरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय' स्थापित है। 

शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025

20 दिसंबर की महत्वपूर्ण घटनाएं



महात्मा गांधी का प्रथम छत्तीसगढ़ आगमन 


राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की छत्तीसगढ़ की प्रथम यात्रा 20 दिसंबर 1920 को हुई थी, जिसमें वे पंडित सुंदरलाल शर्मा के साथ रायपुर आए थे। धमतरी के कण्डेल सत्याग्रह (नहर सत्याग्रह) के लिए आए गांधीजी ने इस यात्रा के दौरान रायपुर में सभाएं कीं और लोगों को असहयोग आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया, जिससे पूरे अंचल में स्वतंत्रता की अलख जगी। रायपुर स्टेशन पर आगमन के बाद, उन्होंने आज के गांधी चौक पर सभा की तथा रायपुर के आनंद वाचनालय (ब्राह्मणपारा) में महिलाओं को संबोधित किया, जहाँ महिलाओं ने उन्हें तिलक स्वराज फंड के लिए अपने गहने भेंट किए।


रॉबर्ट क्लाइव बंगाल के पहले गवर्नर नियुक्त 


1757 ई. में प्लासी के युद्ध में विजय के पश्चात रॉबर्ट क्लाइव को ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा बंगाल का पहला गवर्नर नियुक्त किया गया। यद्यपि उस समय औपचारिक प्रशासन नवाब के नाम पर चलता रहा, परंतु वास्तविक सत्ता कंपनी और क्लाइव के हाथों में केंद्रित हो गई। रॉबर्ट क्लाइव की भूमिका ने भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की संस्थागत नींव रखी, जिसके कारण क्लाइव को भारत में ब्रिटिश सत्ता का संस्थापक माना जाता है।


• 61वाँ संविधान संशोधन से मताधिकार की आयु 18 वर्ष 


भारतीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया में युवाओं को अधिक व्यापक भागीदारी का अवसर देने के उद्देश्य से 61वें संविधान संशोधन द्वारा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों में मताधिकार की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई। यह परिवर्तन अनुच्छेद 326 में संशोधन के माध्यम से किया गया। संसद द्वारा यह संविधान संशोधन अधिनियम 20 दिसंबर 1988 को पारित हुआ और 28 मार्च 1989 को प्रभावी हुआ। 


अंतरराष्ट्रीय मानव एकता दिवस


अंतरराष्ट्रीय मानव एकता दिवस प्रतिवर्ष 20 दिसंबर को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2005 में इसे घोषित किया, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर मानव एकता, समानता और साझा उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करना है। इसका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, सामाजिक न्याय और सतत विकास हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करना है।


एडोल्फ हिटलर की रिहाई 


20 दिसंबर 1924 को, एडोल्फ हिटलर को 1923 के असफल बीयर हॉल पुट्स (तख्तापलट) के लिए राजद्रोह के मामले में नौ महीने की कैद के बाद लैंड्सबर्ग जेल से रिहा कर दिया गया था। जेल में रहते हुए उसने अपनी पुस्तक 'Mein Kampf' लिखना शुरू किया। रिहाई के बाद, उसने नाजी पार्टी को पुनर्गठित किया और 1933 में चांसलर बनने का मार्ग प्रशस्त किया।


भारतीय गोल्फ संघ की स्थापना 


Indian Golf Union (IGU) की स्थापना 20 दिसंबर 1955 को की गई थी। यह भारत में गोल्फ का सर्वोच्च राष्ट्रीय शासी निकाय है, जो नई दिल्ली में स्थित है। यह 194 से अधिक क्लबों के साथ देश में गोल्फ के विकास, अखिल भारतीय एमेच्योर/जूनियर टूर्नामेंटों के आयोजन, और अंतरराष्ट्रीय टीमों (एशियाई खेल) के चयन व प्रशिक्षण के लिए जिम्मेदार है। 


(विभिन्न स्रोतों पर आधारित)




शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025

इतिहास : 13 दिसम्बर की महत्वपूर्ण घटनाएं

 


 • भारतीय संसद पर आतंकवादी हमला (2001)


13 दिसम्बर 2001 को जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े पाँच आतंकवादियों ने भारतीय संसद पर हमला किया। सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई में सभी आतंकी मार गिराए गए। इस घटना में दिल्ली पुलिस, सीआरपीएफ और संसद सुरक्षा के 9 कर्मियों सहित कुल 9-10 व्यक्तियों ने प्राण गंवाए। यह घटना भारत-पाक तनाव के चरम “ऑपरेशन पराक्रम” का कारण बनी।


डॉ. शरद कुमार दीक्षित का जन्म (1930)


13 दिसम्बर 1930 को पंढरपुर (महाराष्ट्र) में जन्मे डॉ. शरद कुमार दीक्षित अमेरिकी प्लास्टिक सर्जन और “द इंडिया प्रोजेक्ट” के संस्थापक थे। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर रोगियों के लिए निःशुल्क प्लास्टिक सर्जरी सेवाएँ प्रदान कीं। मानव सेवा के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया।


उपन्यासकार इलाचन्द्र जोशी का जन्म (1903)


प्रसिद्ध हिंदी मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार और समीक्षक इलाचन्द्र जोशी का जन्म 13 दिसम्बर 1903 को अल्मोड़ा में हुआ। ‘संन्यासी’, ‘परदे की रानी’ और ‘मुक्तिपथ’ जैसे उपन्यास उनके मनोविश्लेषणात्मक लेखन की प्रमुख कृतियाँ हैं। उनके जन्म वर्ष को लेकर कुछ स्रोतों में 1902–1903 का अंतर मिलता है, तथापि 13 दिसम्बर तिथि व्यापक रूप से स्वीकृत है।


अलबेरूनी का निधन (1048)


फ़ारसी विद्वान अल-बीरूनी (अलबेरूनी) का निधन 13 दिसम्बर 1048 को हुआ। वे विज्ञान, गणित, संस्कृत, भूगोल और तुलनात्मक संस्कृति-अध्ययन के अग्रणी माने जाते हैं। उनकी कृति “किताब-अल-हिंद” मध्यकालीन भारत का सबसे विस्तृत और विश्लेषणात्मक विवरण प्रस्तुत करती है।


भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का कलकत्ता अधिवेशन प्रारंभ (1890)


13 दिसम्बर 1890 को कांग्रेस का कलकत्ता अधिवेशन शुरू हुआ, जिसमें फ़िरोज़शाह मेहता अध्यक्ष बने। यह अधिवेशन ब्रिटिश भारतीय शासन में संविधानिक सुधारों और नागरिक अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण था।


संविधान सभा में उद्देशिका (Preamble) का प्रारूप स्वीकार (1946)


13 दिसम्बर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में उद्देशिका (Objectives Resolution) पेश की, जिसने स्वतंत्र भारत के संविधान की आधारभूत भावना और मूल्यों को निर्धारित किया। यही प्रस्ताव आगे चलकर संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का आधार बना।


भारतीय नौसेना के पोत आईएनएस खुंखर को कमीशन (1989)


13 दिसम्बर 1989 को भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल विध्वंसक आईएनएस खुंखर (INS Khukri-2) सेवा में शामिल हुआ। यह “खुखरी वर्ग” का पहला युद्धपोत था, जिसने भारतीय नौसैनिक क्षमता को सुदृढ़ किया।


- ललित मानिकपुरी, छत्तीसगढ़ 



बुधवार, 10 दिसंबर 2025

इतिहास : 10 दिसंबर की महत्वपूर्ण घटनाएं...

शहीद वीर नारायण सिंह


शहीद वीर नारायण सिंह बलिदान दिवस 


1857 के स्वातंत्र्य समर में अंग्रेजों से लोहा लेते हुए अपना बलिदान देने वाले अमर क्रांतिकारी वीर नारायण सिंह का नाम छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद के रूप में प्रतिष्ठित है। वे सोनाखान के जमींदार थे। उन्होंने 1856–57 के अकाल के दौरान ईस्ट इंडिया कंपनी के संरक्षण में पनपी अनाज जमाखोरी और औपनिवेशिक शोषण के विरुद्ध विद्रोह का नेतृत्व किया। 10 दिसम्बर 1857 को उन्हें रायपुर के जय स्तम्भ चौक पर फाँसी दे दी गयी।


विश्व मानवाधिकार दिवस


'संयुक्त राष्ट्र संघ' की महासभा ने 10 दिसम्बर, 1948 को सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणापत्र को अधिकारिक मान्यता प्रदान की थी। तब से प्रत्येक वर्ष 10 दिसम्बर को विश्व मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। सामान्य शब्दों में 'मानवाधिकार' किसी भी इंसान की ज़िंदगी, आज़ादी, बराबरी और सम्मान का अधिकार है। 


अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार 


भारत के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को 1998 में अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। यह पुरस्कार उन्हें कल्याणकारी अर्थशास्त्र, सामाजिक विकल्प सिद्धांत और विकास अर्थशास्त्र में योगदान के लिए मिला था। वे अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय बने।


मैरी क्यूरी, पियरे क्यूरी को हेनरी बेकरेल के साथ नोबेल पुरस्कार 


1903 में आज के दिन पोलैंड-जन्मी फ्रांसीसी वैज्ञानिक मैरी क्यूरी और उनके पति पियरे क्यूरी को फ्रांसीसी वैज्ञानिक हेनरी बेकरेल के साथ रेडियोधर्मिता के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व शोध के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया था। मैरी क्यूरी नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिला बनीं और दो अलग-अलग विज्ञान क्षेत्रों (भौतिकी और रसायन) में नोबेल पुरस्कार जीतने वाली एकमात्र वैज्ञानिक। 


- ललित मानिकपुरी, छत्तीसगढ़ 





शनिवार, 6 सितंबर 2025

मंकू बेंदरा अउ कपटी मंगर (छत्तीसगढ़ी कहानी)

मंकू बेंदरा अउ कपटी मंगर  (छत्तीसगढ़ी कहानी)

"खी खी खी... हूॅंप  हूॅंप..." अइसे अपन भाखा में मंकू बेंदरा के माँ हा मंकू बेंदरा ला किहिस कि - "चल बेटा उतर, चल-चल, हवा बहुत जोर से चलत हे। मौसम बिगड़त हे, कहूँ बने ठउर में जाबो!" 

फेर उतलइन मंकू बेंदरा हा पेड़ के अउ ठीलिंग में चढ़गे। हवा सनसनावत राहय। डंगाली एती ओती लहसत राहय। तेमा ओरम के मंकू हा झूले के मज़ा लेवत राहय। 

मंकू के माँ हा ओला धर के तीरे बर ऊपर डाहर चढ़े लगिस, तभे हवा अचानक जोर के आँधी बनगे। डारा रटाक ले टूट गे। आँधी में मंकू बेंदरा हा डारा सुद्धा नदिया डाहर फेंकागे। 

नदिया में मंगर हा मुँहूँ फारे ताकत राहय। ओहा बड़ दिन के जोंगत रिहिस कि, "एको दिन एको झन बेंदरा कहूँ गिर जतिस ते बढ़िया पार्टी मनातेंव!"

ओहा मने मन सोचय कि, "ये बेंदरा मन अतेक मीठ-मीठ जामुन खाथें त ऊॅंकर माॅंस में कतका सुवाद होही, अउ करेजा कतका सुहाही!" बेंदरा मन ला देख के ओकर लार टपक जाय। फेर अपन ये इच्छा ला मन में लुकाय ऊपरछवा ऊॅंकर हितवा-मितवा बने राहय। 

आज मंकू बेंदरा ला नदिया में गिरत देख के मंगर हा लपक गे। मंटू ला खाए बर अपन मुँहूँ ला जबर फार डरिस। लेकिन ऊपर ले गिरत-गिरत मंकू बेंदरा हा ओला देख डरिस। खतरा के अंदाजा होगे। पल भर में सोच डरिस कि कइसे बाँचे जाय। 

गिरत-गिरत मंकू बेंदरा हा मंगर के मुँहूँ में डारा ला ख़ब ले खोंस दिस। जामुन के डारा हा मंगर के टोटा के भीतरी के जावत ले अरझ गे। डारा के दूसर छोर ला कस के धरे मंकू बेंदरा हा मंगर के पीठ में गोड़ फाॅंस के‌ बइठ गे।‌ 

पीरा के मारे मंगर छटपटाय लगिस।‌‌ टोटा के भीतर के जात ले खुसेरे डारा ला उलगे के उदिम करय, फेर उलग नइ पाय। 

ओहा मंकू बेंदरा ला अपन पीठ ले गिराए के भारी उदिम करिस, फेर मंकू तो डारा ला कस के धरे राहय, अउ अपन दूनो पाँव ले घलो कस के फाॅंसे राहय। 

मंगर के‌ बड़ ताकत रिहिस। मंकू जानत रिहिस कि एक कनिक भी चूक होइस ते जीव नइ बाॅंचय। ओ पूरा सवचेत रिहिस। 

मंगर हा मंकू ला बुड़ोय बर गहिर पानी में उतरे लगिस। मंकू अकबकागे।‌ 

तभे मंकू‌ ला अपन माॅं के गोठ सुरता आगे कि, "मंगर मन हा पानी के भीतर में घलो बड़ बेरा ले साॅंस थाम के रहि जथें। लेकिन ऊॅंकर ऊपर जब अलहन बिपत आथे तब धुकधुकी में ओकर साँस तेज हो जथे। तब साँस लेबर ऊपर डाहर आए ला परथे!"

ये बात के सुरता करत मंकू बेंदरा हा मंगर के टोटा में फॅंसे डारा ला हलाय लगिस। मंगर हा पीरा में बायबिकल होगे। साँस लेबर ऊपर डाहर आइस, तब मंकू घलो साँस ले पाइस।‌ 

बड़ बेरा ले ऊंकर दूनों के बीच लड़ई चलत रिहिस। दूनों लस्त पर गें। मंगर ला घलो जानब होइस कि मोरो जीव छूट सकत हे। अइसे में समझौता करना ठीक रही। ओहा मंकू के हाथ-पाँव जोड़े लगिस। किहिस- "मोला माफी दे भाई, मोला छोड़ दे।"

मंकू किहिस - "तब तैं मोला मोर ठउर तक अमरा दे।"

मंगर हा चुपचाप ओला ओकर ठउर में लान दिस। मंकू हा मंगर के मुँहूँ ले डारा ला सूर्रत चप ले कूद के पेड़ में चढ़ गे। 

पेड़ के ऊपर ले मंगर ला किहिस - "तोर मुँहूँ में डारा ला अपन जीव बचाय बर खोंसे रहेंव संगी, तोर जीव लेना मोर मकसद नइ रिहिस। हमन तो तोला मया करत रोज मीठ-मीठ जामुन खवावन। अउ तैं हमर संग कपट करे।"

मोर माँ तो मोला पहिली ले मोला चेताय रिहिस कि - "बेटा काकरो संग बैर मत करबे, फेर काकरो ऊपर आँखी मूँद के भरोसा घलो झन करबे। मोर माँ मोला यहू सिखाय रिहिस कि, बिपत के बेरा घबराबे झन, हिम्मत देखाबे। आज मोर माँ के सीख मोला बचा लिस।" 

अइसे काहत मंकू अपन माँ ला पोटार लिस। अब आँधी थम गे रिहिस। 

✍️ ललित मानिकपुरी, महासमुंद 


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